क्लाइमेक्स ऑफ़ एवोलुशन
सहज योग मानवता के विकास की चरम सीमा का ज्ञान है | मानव शरीर को परमात्मा के प्रेम की शक्ति कुण्डलिनी ने माँ के गर्भ में बनाया है | कुण्डलिनी परमेश्वर की शुद्ध इच्छा शक्ति है |
मोक्ष क्या है? जीते जी परमात्मा या परमात्मा की शक्ति से योग पाना या एकाकार होना ही योग है और यही मोक्ष है। इस स्थिति की प्राप्ति प. पू. श्री माता जी निर्मला देवी द्वारा प्रणित सहजयोग द्वारा आत्मसाक्षात्कार पाने से ही संभव हो सका है। आज अनेक सहजयोगी जन इसका आनंद ले रहे हैं। जय श्री माता जी।